ये शा'इरी तब तक ही अच्छी थी अमित
जब पास में तेरे वो लड़की थी अमित
वो पास थी मेरे तो ख़ुश था मैं बहुत
वो जब नहीं थी तो उदासी थी अमित
तुम मत बताओ वो बुरी है या नहीं
वो लड़की जैसी भी थी अच्छी थी अमित
बच्चों के जैसे हरकतें थी उस की तो
वो हाथ अपने काट लेती थी अमित
तुम ने अमित परियों को देखा है कभी
परियों के जैसी ही वो दिखती थी अमित
— Daqiiq Jabaalii















