दर्दो-ग़म में मुस्कुराना आ गया
वक़्त शायद शाइराना आ गया
वास्ता जब ख़ार से यारो पड़ा
गुल मुहब्बत के खिलाना आ गया
दोस्ती ग़म से हुई जिस दिन मिरी
बेसबब आँसू बहाना आ गया
ज़िन्दगी की कश्मकश में अब मुझे
रोते-रोते मुस्कुराना आ गया
बिक रहा ईमान मेरे शहर में
या ख़ुदा कैसा ज़माना आ गया
सुर्ख़ मौसम जान न ले ले कहीं
याद वो जंगल पुराना आ गया
चल 'धरम' सच्चाई का परचम उठा
आँधियों का अब ज़माना आ गया
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