bhavnaaon ko to dariyaa ka kinaara hi nahin | भावनाओं को तो दरिया का किनारा ही नहीं

  - "Dharam" Barot

भावनाओं को तो दरिया का किनारा ही नहीं
'इश्क़ में तो आपका अब तक सहारा ही नहीं

है बहुत नारे मगर ये 'इश्क़ में तो अब तलक
दर्द ही है 'इश्क़ में आमोद नारा ही नहीं

हार मैं तो था गया पर देखना ये भी तुझे
हौसला तो मैं कभी भी देख हारा ही नहीं

मार कर ख़ंजर मुझे तू खुश तो होगा यार पर
जी रहा में फिर भी ख़ंजर तुझको मारा ही नहीं

साथ है ये बात सब करते मगर सच है यही
काम पर जो काम आए उस सेे प्यारा ही नहीं

ये लड़ाई धर्म के जो नाम पर लड़ तुम रहे
जान लो ये अम्न से तो कुछ भी न्यारा ही नहीं

  - "Dharam" Barot

Rahbar Shayari

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