मान कर मत बैठ तू कमज़ोर है
देख कर करतब कहेंगे मोर है
मार कर ख़ंजर चला जा पीठ पर
लोग कहते भी हैं तू कमज़ोर है
याद कर वो वार पहला पीठ का
कह रहा है तू ये तुझ में ज़ोर है
ग़लती का एहसास अच्छे से तुझे
दिख रहा है तेरे मन में चोर है
ज़िंदगी मतलब यही है मेरे दोस्त
है उजाला साथ में घनघोर है
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by "Dharam" Barot
our suggestion based on "Dharam" Barot
As you were reading Friendship Shayari Shayari