आदमी हो या हो औरत एक दिन सब ख़ाक है
है मुझे हैरत कि फिर क्यूँ सबकी लंबी नाक है
डाकिए के आते ही फिर मेरी धड़कन बढ़ गई
ऐसा लगता है कि यारो आई उस की डाक है
अब हमारा वक़्त यारो और भी बलवान है
दुश्मनों के एरिया में अब हमारी धाक है
तोड़ने बर्बाद करने की बड़ी कोशिश की है
मसअला ये है कि यारो सोच मेरी पाक है
इस लिए अब आशिक़ी में अपना मन लगता नहीं
आजकल की आशिक़ी से दिल हमारा चाक है
— Yash Sharma















