देखते हैं हम भी सपने दोस्तो
थोड़े सच्चे थोड़े कच्चे दोस्तो
वो सभी कुछ सच बताता है हमें
आइना डरता है किस से दोस्तो
हर गए दिन देख कर घर में कलह
डर गए हैं घर में बच्चे दोस्तो
आए हैं दामाद जी जबसे यहाँ
हो रहे हैं घर में झगड़े दोस्तो
मुफ़लिसी के दौर में थे जब भी हम
दूर थे सब यार अपने दोस्तो
जब से वो मेरी ग़ज़ल में आई है
करते हैं सब उस के चर्चे दोस्तो
उस के घर क्यूँ आज कल जाते नहीं
कहते हैं ये 'यश' से रस्ते दोस्तो
— Yash Sharma















