साल ये और दे गया यादें
दर्द है फिर वही दवा यादें
ख़ास कुछ तो हुआ नहीं लेकिन
हो गईं एक से सवा यादें
साँस लेना भी ना मुनासिब है
इश्क़ में हो गईं हवा यादें
लौट कर जो वफ़ा नहीं आई
उस की आती हैं बे-वफ़ा यादें
वो तो मेहमाँ है लौट जाएगा
तुम को आनी हैं बारहा यादें
— Dinesh Sen Shubh















