साॅरी उस ने मुझे कहा है फिर
या'नी अब कुछ तो हादसा है फिर
जिस के जीने का कुछ इलाज नहीं
उस को तो मौत ही दवा है फिर
है तमाशा ये ज़िन्दगी मेरी
तेरा होना भी शो'बदा है फिर
वस्ल का चश्मदीद है तन्हा
ख़ुद-ब-ख़ुद दीप जल गया है फिर
कोई आदम का नाम साथ नहीं
जी मेरी ज़ात ख़ामख़ा है फिर
— Firdous khan















