महफ़िल में इक लड़की के आने से
लड़के बन जाते हैं दीवाने से
दिल खिल जाए बिल्कुल वैसी ख़ुशबू
उठकर आती है उस के शाने से
वो कह दे तो गा भी दूँगा लेकिन
लज़्ज़त आती है ऐसे गाने से
— Prakamyan Gautam
लड़के बन जाते हैं दीवाने से
दिल खिल जाए बिल्कुल वैसी ख़ुशबू
उठकर आती है उस के शाने से
वो कह दे तो गा भी दूँगा लेकिन
लज़्ज़त आती है ऐसे गाने से
Other ghazal from the same pen
Shers of dil.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling