ये दुनिया बग़ैर उस के भी, हाँ हसीं है

मगर दिल बग़ैर उस के लगता नहीं है

मुझे अब ये दिखने लगा है की तू है,
वहाँ उस जगह भी जहाँ तू नहीं है

मुसीबत में हूँ मैं, ज़रूरत है तेरी
तू अब लौट आ जा जहाँ भी कहीं है

जिसे ढूँढ़ते हो ज़माने में, वो ग़म,
मिरे दिल में बैठा है छुप कर, यहीं है

मुझे ख़ुद को समझाना पड़ता है अब तो,
यहाँ बस तेरा अक्स है, तू नहीं है

— Hasan Raqim

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Raaz Shayari

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