"लिस्नर"

कभी ख़ामोश रह कर देखना इस ज़िंदगी को तुम
तुम्हें औरों के होंटों पर
कई रंगों के अफ़्साने मिलेंगे
जो सह
में सह
में से कुछ कहना चाहेंगे
मगर तुम बोलना मत
उन्हें सुनने की कोशिश करना
हो सकता है तुम्हारा बात करने को जी चाहे
हो सकता है कि इतनी देर चुप रहने से
तुम्हें तो उल्टियाँ होने लगे
मगर तुम बे-क़रारी को सँभाले
हुए रंगों की ख़ुशबू ओढ़ लेना और
उसी दुनिया में खो कर अपना मन आबाद कर लेना

ये ख़ामोशी तुम्हारे सामने
कई तन्हा से लफ़्ज़ों की रिहाई के
दरीचे खोल देगी
तुम्हारे पेट की सब तितलियाँ भी
उन्हीं बातों को दुनिया मान लेगी
जो भी उस कैनवस का हिस्सा होंगी

वहाँ से सारे सन्नाटे रवाँ हो कर
नए रस्ते की जानिब चल पड़ेंगे
जहाँ कोई सियाही से
तुम्हारी ज़िंदगी के रंगों को
नए आयाम दे कर छोड़ देगा
जहाँ उन रंगों की सब परतें खुल जाएँगी

वहीं पर उन के होंटों की सहेली सैंकड़ों
इशारे कर रही होंगी
जहाँ से उस कहानी के सभी किरदार अपनी
अदाकारी से बाक़ी सीन को पूरा करेंगे

ये सारी बातें तो होती रही हैं सालों से
मगर इस बार की सतरें भी धीमी करवटें ले कर
तुम्हारे मन पटल पर
नया ख़ाका बना कर छोड़ देगी
जो शायद यूँ नहीं था पहले!

— Ajay Kumar

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