सूखे होंठों से नदी की बानी सुन कर
भर गया आँखों में पानी,पानी सुन कर
क्या इमाम-ए-हिन्द कहते होंगे ऐ दोस्त
भक्तों के लब, नफ़रतों की बानी सुन कर
दोस्त दुश्मन हो गए मज़हब के ख़ातिर
होती है मुझ को बहुत हैरानी सुन कर
नाम सुन कर उस का ऐसे तड़पे हैं हम
जैसे तड़पे है पियासा पानी सुन कर
दोस्त औ' महबूबा में "इरशाद" देखो
कौन आता है तिरी वीरानी सुन कर
— Irshad Siddique "Shibu"















