"माँ की गोद"
कभी-कभी सोचता हूँ
कि माँ की गोद में सर रख कर
ख़ूब जी भर के रोऊँ
मगर ये भी सोचता हूँ
जो माँ अपने बच्चे को एक सुई चुभने पे
ज़ार-ओ-क़तार रोने लगती थी
वो माँ अपने जवान बेटे की आँखों में आँसू देखेगी
तो मंज़र क्या होगा
ये सोच कर मेरी धड़कनें तेज़ हो जाती हैं
आँखें लाल हो जाती हैं
बिन मौसम के बादल छा जाते हैं
बारिशें तेज़ होने लगती हैं
मेरे कमरे में सैलाब उमड़ पड़ता है
और सारा बिस्तर छोड़ कर
मेरा तकिया भीग जाता है
मैं जब भी माँ की गोद में सर रख कर रोना चाहता हूँ
मेरी रूह काँप जाती है
— Irshad Siddique "Shibu"















