हो पाए तुम से तो दरिया को सागर करना
पर ग़लती से भी उस के दिल में मत घर करना
इक ऐसी औरत से मैं वाबस्ता हूँ ऐ दोस्त
जो जाने है कैसे इक दिल को पत्थर करना
खिलजी गर ज़िंदा होता तो तू उस की होती
तेरी बिसात के बाहर होता जौहर करना
खेल में भी औरत पाए मर्द के बराबर हक़
रानी मर जाए तो राजा भी बाहर करना
इतना जल्दी मेरा दुख मिसरों में आता है
जितना जल्दी तवायफ़ को आता बिस्तर करना
— Jagveer Singh















