ख़ुश्बू सबा गुल ज़ाफ़राँ सब तेरे आगे ज़ार है
तू है कसौटी नूर की तू हुस्न का में'यार है
तेरी हँसी से है फ़ज़ा तेरी अदा से है बहार
है वो मुक़द्दर ज़ुल्फ़ के सर जिस
में तेरा प्यार है
तेरी तबस्सुम से मुझे हर रंग हैं सुर्ख़-ओ-सुख़न
तेरे ख़फ़ा होने पे जाँ क़ौस-ए-क़ुज़ह बेज़ार है
तू इश्क़ का दरिया तेरा हर एक क़तरा तो है अमि
दुनिया-ए-फ़ानी पार है वो जो भी तेरे पार है
तू ने नवाज़ा हम को अहल-ए-हमनवा सो ख़ुश-नसीब
'जगवीर' सा बद-बख़्त भी तेरी नज़र में यार है
— Jagveer Singh















