ज़िंदगानी पे शे'र कहते हैं

बहते पानी पे शे'र कहते हैं

हम को आदत नहीं है रुकने की
हम रवानी पे शे'र कहते हैं

किस कहानी पे शे'र कहने थे
किस कहानी पे शे'र कहते है

इश्क़ की पहली शर्त है ऊला
हम कि सानी पे शे'र कहते हैं

दूर रख कर तमाम तोहफ़ों को
इक निशानी पे शे'र कहते हैं

इतने बर्बाद हो चुके हैं हम
राएगानी पे शे'र कहते हैं

बाग़बानों ख़याल रखना फूल
बाग़बानी पे शे'र कहते हैं

— Vishal Janib

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