“मैं परिंदा हूँ “

मैं परिंदा हूँ मगर अफ़सुर्दा हूँ
मुझ को जाने दो तुम्हारा अपना हूँ

आसमाँ मुझ को बुलाता है वहाँ
चलती है ठंडी हवाएँ भी जहाँ
मुझ को उड़ने दो मैं भी शहज़ादा हूँ
मैं परिंदा हूँ मगर अफ़सुर्दा हूँ

जब भी अपने मीठे सुर में गाते हैं
मेरी इन आँखों में आँसू आते हैं
साथ उन के रहने दो मैं ज़िंदा हूँ
मैं परिंदा हूँ मगर अफ़सुर्दा हूँ

मेरे भी कुछ ख़्वाब हैं सुनते नहीं
मुझ में कितने ज़ख़्म हैं बुनते नहीं
ख़्वाब पूरे होने दो मैं बच्चा हूँ
मैं परिंदा हूँ मगर अफ़सुर्दा हूँ

मैं परिंदा हूँ मगर अफ़सुर्दा हूँ
मुझ को जाने दो तुम्हारा अपना हूँ

— Meem Alif Shaz

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