रात है ग़म है दवा है और मैं हूँ
ज़िन्दगी की यह सज़ा है और मैं हूँ
मैं अकेला और वह भी है अकेली
'इश्क़ में इतनी ख़ला है और मैं हूँ
याद है तस्वीर है कैसे भुला दूँ
उस की ख़ुशबू की हवा है और मैं हूँ
मैं किधर जाऊँ न कोई रास्ता है
बस मुसीबत की फ़िज़ा है और मैं हूँ
मैं कभी डरता नहीं हूँ तो डरूँ क्यूँ
इस जहाँ में बस ख़ुदा है और मैं हूँ
यह जो फैला है धुआँ है और कालिख
इस धुएँ में कुछ नशा है और मैं हूँ
हौसला अब रात में भी कम न होगा
चाँद का हर दर खुला है और मैं हूँ
मौत मुझ को भी न जाने कैसे आए
मौत की अपनी अदा है और मैं हूँ
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