"मेरा ग़म"
कभी भी कहाँ कुछ कहा उस ने मुझ को
फकत एक दी बद-दुआ उस ने मुझ को
कहा था कभी भी नहीं होंगे रुख़सत
कहा फिर कभी अलविदा उस ने मुझ को
फ़क़त एक दी बद-दुआ उस ने मुझ को
नहीं होती कोई गुज़ारिश ये दिल में
नहीं दिल में कोई गिला मेरे होता
नहीं इन दिवारों से बाहर निकलता
नहीं कोई दिल में सिवा तेरे होता
नहीं होती धड़कन धड़कता न दिल ये
नहीं तुम जो होते कहा उस ने मुझ को
फकत एक दी बद-दुआ उस ने मुझ को ....
कभी जो मिले तो बुलाना नहीं फिर
दुबारा बुलाए तो जाना नहीं फिर
समझना ख़ुदा ही मुहब्बत है यारों
बनाया था अपना ख़ुदा उस ने मुझ को
कहा फिर कभी अलविदा उस ने मुझ को
फकत एक दी बद-दुआ उस ने मुझ को















