दिल की बातें बरमला कह लीजिए
आप हम को बे-वफ़ा कह लीजिए
कल के होने का किसे अंदेशा है
आज जी भर के बुरा कह लीजिए
ज़ख़्म खा कर मुस्करा देना मेरा
बेबसी की इंतेहा कह लीजिए
ज़िन्दगी की तर्जुमानी क्या करें
लम्हा ए आहो बुका कह लीजिए
नाम तो अपना भुलाया जा चुका
हम को गुमनाम ए वफ़ा कह लीजिए
दिल के अफ़साने को क्या उनवान दूँ
रंजिशों का सिलसिला कह लीजिए
काज़िम इन बे सूद ग़ज़लों को फ़क़त
इक नवा ए ना रसा कह लीजिए
— Kazim Rizvi















