हिज्र के दिन गुज़ारने वाला

दिल खिलाड़ी है हारने वाले

मेरे दिल से उतर नहीं पाया
मुझ को दिल से उतारने वाला

बद-दुआ है, कि ख़ाक हो जाए
तेरी ज़ुल्फ़ें संवारने वाला

मेरे अल्फ़ाज़ क्यूँ ना कड़वे हों
मैं हूँ क़िस्मत का हारने वाला

ख़ुश-गवारी की आरज़ू न करे
मेरी ख़ुशियों को मारने वाला

— Kazim Rizvi

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