azal se to abad tak hai guzaare ka sahaara dukh | अज़ल से तो अबद तक है गुज़ारे का सहारा दुख

  - Khalid Azad

अज़ल से तो अबद तक है गुज़ारे का सहारा दुख
ख़ुदा ने साथ आदम के उतारा है ये सारा दुख

इसी डर से किसी ग़म का मनाया ही नहीं मातम
ज़माना ये न समझे फिर अभी तक है तुम्हारा दुख

सभी के साथ बांँटी है हमेशा हर ख़ुशी हमने
मगर हमने तो तन्हा ही शबों में है गुज़ारा दुख

जहाँँ पर इज्ज़त-ए-नफ़सी से बढ़कर कुछ नहीं होता
वहाँँ समझे कोई कैसे तुम्हारा दुख हमारा दुख

अभी आग़ाज़-ए-उल्फ़त है अभी मुमकिन पलटना है
वगरना तुम भी चीख़ोगे हमारा दुख हमारा दुख

मुहब्बत के सफ़ीने तो ग़मों से पार होते हैं
वही साहिल पे उतरेगा है जिस का बस किनारा दुख

  - Khalid Azad

Duniya Shayari

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