हम अपनी आँख से मंज़र नया तलाशेंगेउजड़ जो जाए तो फिर घर नया तलाशेंगेज़रा सी चोट से सब कुछ समझ में आ जाएतो अब की राह में पत्थर नया तलाशेंगे— Khalid Azad