तय्यार नहीं
ज़रा अपने बालों को बाँध रखो
दिल अब झूम जाने को तय्यार नहीं
बनाए रखो दूरी कुछ अपने दरमियाँ
दिल अब क़रीब आने को तय्यार नहीं
कर गुजरे हैं मोहब्बत हम भी कभी
दिल अब तुम्हें आज़माने को तय्यार नहीं
है दूर जहाँ से, सुकून कि तलाश में
दिल अब ज़हर खाने को तय्यार नहीं
हम ही जाने, क्या ग़म से हम गुजरे
दिल अब और ग़म पाने को तय्यार नहीं
— Kohar















