रिश्ते ये जोड़े हुए हैं
वरना कब तेरे हुए हैं
आदमी ठहरा हुआ है
रास्ते भटके हुए हैं
प्यार दो वर्षों रहा बस
फिर तो बस झगड़े हुए हैं
क्या बताए काम का तो
सब के सब लटके हुए हैं
ये गरजने वाले बादल
कल कहीं बरसे हुए हैं
क्या सुधारोगे हमें तुम
बिगड़े थे, बिगड़े हुए हैं
— Deepak Pathak















