mili ye raat kahti hai savera chip ke baitha hai | मिली ये रात कहती है सवेरा छिप के बैठा है

  - Divya 'Kumar Sahab'

मिली ये रात कहती है सवेरा छिप के बैठा है
तेरे दिल में बताऊँ प्यार मेरा छिप के बैठा है

सजाया है हँसी को पर पकड़ में आ गया ये ग़म
जलाया है दिया फिर भी अँधेरा छिप के बैठा है

तेरी आँखें चलाती हैं इधर तलवार काजल की
बताती हैं तेरी पलकें लुटेरा छिप के बैठा है

मैं बैठा पास तो ज़ुल्फ़ों की ख़्वाहिश थी मिलें मुझ सेे
इन्हें पकड़े हुए क्लेचर ये तेरा छिप के बैठा है

कहे चिड़िया मेरे बच्चों के पर आए नहीं अब तक
शजर कहता रहा चिड़ियों का डेरा छिप के बैठा है

  - Divya 'Kumar Sahab'

Charagh Shayari

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