सोने से पहले ख़्वाब तुम्हारे पहन लिए
इस आँख ने तो घाव ही सारे पहन लिए
जब आसमाँ ने आज लबादा पहन लिया
तब जुगनुओं ने चाँद सितारे पहन लिए
मैं भी घुला मिला नहीं ख़ल्वत बना लिया
मैं ने भी आस पास किनारे पहन लिए
काजल लगा तो नैन धनुष में बदल गए
फिर तीर से नज़र ने इशारे पहन लिए
— Divya 'Kumar Sahab'















