नज़्म - वो क्या है
उस की आँखें कैसी हैं
उस की आँखें रब सी हैं
उस की बातें कैसी हैं
उस की बातें रौनक़ हैं
उस की यादें कैसी हैं
मेरी रातों जैसी हैं
उस की यादें हिज्र है क्या
ये फ़क़त बेकार किस ने बोली है
उस का चेहरा कैसा है
उस का चेहरा चाँद सा है
उस की ज़ुल्फ़ें कैसी है
उस की ज़ुल्फ़ें क़ाएनात है
उस का साथ चलना क्या है
मेरा आगे और आगे बढ़ना है
उस की बिंदिया कैसी है
माथे पर चाँद जैसी है
उस का बोलना कैसा है
सारे फ़ज़ा में फ़क़त प्यार ही घोलना है
बाग़ में उस का होना कैसा है
सारे फूलों को बस खिलना है
उस से मुहब्बत किस को है
उस से मुहब्बत सब को है
जिस को उस ने चाहा है
उस का मुक़द्दर रब ने लिक्खा है
मेरी ग़ज़लें मेरी नज़्में क्या है
उन के सारे हर्फ़ और सारे मिसरे उस पर है
मेरी ग़ज़ल का मतला क्या है
उस का चेहरा है
शे'र के मिसरे क्या हैं
उस की दो आँखें हैं
ग़ज़ल का क़ाफ़िया क्या है
क़ाफ़िया उस के लब हैं
तो रदीफ़ क्या है
वो उस की सुंदरता है
बताओ फिर मक़्ता क्या है
वो उस का दिल है
उसपर क्या क्या जँचता है
उस पर साड़ी सूट सब जँचता है
उस के गाल में पड़ता वो गड्ढा
देखो मुझ को दीवाना करता है
उस का हुस्न तो है बहुत सुंदर
रूह में उस के रब बसता है















