कहने को बाज़ी ये बाज़ी है
इश्क़ में तेरे हम माँझी है
इश्क़ क्या है पता ही नहीं
बात कैसे ज़बाँ आती है
कहने को बातें है तो सही
सुनने को एक नहीं राज़ी है
बात करनी कई सारी है
वक़्त की थोड़ी सी तेज़ी है
— Sanjay Vyas 'Sahiba'
इश्क़ में तेरे हम माँझी है
इश्क़ क्या है पता ही नहीं
बात कैसे ज़बाँ आती है
कहने को बातें है तो सही
सुनने को एक नहीं राज़ी है
बात करनी कई सारी है
वक़्त की थोड़ी सी तेज़ी है
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