उस ने बाँहों में छुपाया है मुझे
मरते मरते होश आया है मुझे
गिर गया था मैं ख़ुशी की भीख में
फिर उदासी ने उठाया है मुझे
जिस की बातों ने हँसाया था कभी
उस की बातों ने रुलाया है मुझे
जिस को भी मैं ने कहा तू दोस्त है
फिर उसी ने आज़माया है मुझे
ज़हर भी मंज़ूर था दे देते,पर
नाम उस का क्यूँ सुनाया है मुझे
आख़िरी ग़म था 'अलौकिक' मैं यहाँ
बे-दिली ज़िंदा जलाया है मुझे
— Madan Gopal 'AloukiK'















