मुझे मन में बसाकर क्या करोगी तुम
मुझे अपना बना कर क्या करोगी तुम
मुझे तो लोग अब कहते शराबी हैं
मुझे शरबत पिलाकर क्या करोगी तुम
मिरा तो अब ठिकाना मय-कदा है बस
मुझे दिल में बसाकर क्या करोगी तुम
सुनो हारा हुया हूँ ज़िंदगी से मैं
मुझे सब से जिताकर क्या करोगी तुम
— Jaypratap chauhan















