तूफ़ान के निशान रह गए हैं
मलबे नुमा मकान रह गए हैं
ओले पड़े तभी यहाँ सभी फिर
रोते हुए किसान रह गए हैं
बेटी को ही पढ़ाना था उसको
दो ख़ाली माँ के कान रह गए हैं
फल तो कभी मिला नहीं हमको
हिस्से में इम्तिहान रह गए हैं
इंसानियत सभी की मर गई है
मुर्दा यहाँ जहान रह गए हैं
चाहत तो मार दी गई है यहाँ
नफ़रत के ख़ानदान रह गए हैं
घर इसलिए बिखर रहा था एक
दो भाई में गुमान रह गए हैं
माँ बाप को निकालते ही घर
में ख़ाली मर्तबान रह गए हैं
क्यूँँ बोलते नहीं मनोज ये लोग
सब बनके बे-ज़बान रह गए हैं
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