baddua gar nahin to kiski dua hai mirza | बद्दुआ गर नहीं तो किसकी दुआ है मिर्ज़ा

  - Amaan mirza

बद्दुआ गर नहीं तो किसकी दुआ है मिर्ज़ा
फिर से तुमने किसी से 'इश्क़ किया है मिर्ज़ा

मुद्दतों बाद तुम्हारा किसी ने पूछा है हाल
मुद्दतों बाद कोई दोस्त मिला है मिर्ज़ा

मैं मुहब्बत से उसे कहता हूँ दिल की बातें
और वो ग़ुस्से में कहता है ये क्या है मिर्ज़ा

अब तो हर शख़्स मुझे देख के ये कहता है
किसी के ग़म ने तुम्हे चाट लिया है मिर्ज़ा

शक़्लो सूरत से नहीं दिखती जवानी मेरी
'उम्र पच्चीस में बूढ़ा हो गया है मिर्ज़ा

  - Amaan mirza

Udasi Shayari

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