कम 'उम्र में जवानी के साँचे में आ गया
फिर एक शख़्स आपके झाँसे में आ गया
तस्बी में गुरिया कम ही थी शायद इसी लिए
एक और मोती आपके धागे में आ गया
क़ीमत लगेगी आपके हुस्नो जमाल की
ताजिर भी अब तो आपके कूचे में आ गया
बस एक रात और हंसी लम्हों के लिए
नादान था वो शख़्स दिलासे में आ गया
उस सेे तो बात करके भी शर्मिन्दगी हुई
जिसका भी लहजा आपके लहजे में आ गया
एहसान आपका भी ये मुझ पर रहा सदा
चेहरा ये बदनुमा जो उजाले में आ गया
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