ये मत पूछो हम ने कितना ज़ब्त किया

तुम से बेहतर तुम से अच्छा ज़ब्त किया

इक आँसू भी इन पलकों पर आ न सका
अब के मैं ने अच्छा ख़ासा ज़ब्त किया

शायद कोई पूरी उम्र न कर पाए
तेरे हिज्र में मैं ने जितना ज़ब्त किया

इस दर्द को सह लेना कुछ आसान न था
या'नी तुम ने बेहद उम्दा ज़ब्त किया

मेरे जैसा कौन है मोनिस ये जिस ने
इतना उम्दा इतना आला ज़ब्त किया

— Monis faraz

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