हुस्न तेरा यूँँ काम में लाया जा सकता था
बंदा बंदा मूर्ख बनाया जा सकता था
तुझ से गर बाहों में आया जा सकता था
तो फिर मेरा दिल पिघलाया जा सकता था
ला-हासिल से काम चलाया जा सकता था
कितना कुछ था जो ठुकराया जा सकता था
दुनिया रूठी तब जा कर एहसास हुआ ये
आईने को दोस्त बनाया जा सकता था
माना मैं भी ग़लत हो सकता हूँ लेकिन दोस्त
कम से कम तुझ से समझाया जा सकता था
बादाम आँखें मीठा लहजा प्यारी बातें
तीन खिलौनों से बहलाया जा सकता था
एक दफ़ा फिर से कोशिश कर सकते थे तुम
ज़हर तो दो दिन रुक कर खाया जा सकता था
— Mukesh Guniwal "MAhir"















