यूँँ छिपकर आहें भरते हो
क्यूँ नादाँ ऐसा करते हो
कह भी दो गर उल्फ़त है तो
इस दुनिया से क्यूँ डरते हो
नज़रें ये सच में शातिर हैं
या हम को पागल करते हो
देखो समझो मेरी बातें
क्यूँ झगड़ा वगड़ा करते हो
दिल में हलचल होती है जब
तुम सर सीने पर धरते हो
नाज़िम तुम पर मरता है बस
क्या तुम भी उस पर मरते हो
— Najmu Ansari Nazim















