यूँँ छिपकर आहें भरते हो
क्यूँ नादाँ ऐसा करते हो
कह भी दो गर उल्फ़त है तो
इस दुनिया से क्यूँँ डरते हो
नज़रें ये सच में शातिर हैं
या हमको पागल करते हो
देखो समझो मेरी बातें
क्यूँँ झगड़ा वगड़ा करते हो
दिल में हलचल होती है जब
तुम सर सीने पर धरते हो
नाज़िम तुम पर मरता है बस
क्या तुम भी उस पर मरते हो
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Najmu Ansari Nazim
our suggestion based on Najmu Ansari Nazim
As you were reading Violence Shayari Shayari