apna likkha aur sabhi ka chhod diya | अपना लिक्खा और सभी का छोड़ दिया

  - Praveen Sharma SHAJAR

अपना लिक्खा और सभी का छोड़ दिया
पल भर लिक्खा और सदी का छोड दिया

जिन पैरों में कुचल के जन्नत मिलनी थी
हमने उन पैरों का रस्ता छोड़ दिया

आज कि सर पर घर की जिम्मेदारी थी
हमने उस डोली का रस्ता छोड़ दिया

हमको सारा शहर तसल्ली देता है
हमने अपने गाँव का घर क्या छोड़ दिया

एक दिन ग़ज़ल लिखी थी दफ़्तर लेट हुआ
फिर क्या बस दफ़्तर का रस्ता छोड़ दिया

तेरे अख़बारों की ख़बरें झूठी हैं
हमने तेरा शहर तो कब का छोड़ दिया

  - Praveen Sharma SHAJAR

Jhooth Shayari

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