जी तो करता है मगर
जी तो करता है तुझे दिल के हक़ीक़त कह दूँ
दिल तो कहता है मुझे तुझ से है उल्फ़त कह दूँ
तेरे चेहरे पे तबस्सुम का वो आना अक्सर
मेरे सीने में चुभन और सुकूँ देता है
तेरे आरिज़ पे वो लाली का चमकना इक दम
मेरे भड़के हुए जज़्बों को तुलू देता है
चाहता हूँ कि तेरा हाथ पकड़ कर कह दूँ
मुझ को ये हाथ हमेशा के लिए पकड़ा दे
सोचता हूँ कि तेरी आँखों में आँखें डालूँ
और कह दूँ मेरे जज़्बात को तू अपना ले
मेरे दिल के ये जो जज़्बे हैं अयाँ तो कर दूँ
फिर ये जज़्बात बिखर जाने का डर लगता है
तुझ को बतला दूँ मुझे तुझ से बहुत उल्फ़त है
फिर मगर तेरे मुकर जाने का डर लगता है
सोचता हूँ कि मैं जल्दी में करूँ क्यूँ कुछ भी
तेरे दिल में भी हैं जज़्बात तसल्ली कर लूँ
मेरे एहसास को पानी में बहाएगी न तू
सब से पहले तो मेरे दिल की तशफ्फ़ी कर लूँ
कहीं ऐसा तो नहीं मैं ही समझता हूँ फ़क़त
तेरे दिल में तो कहीं कोई मुहब्बत ही न हो
मैं जिसे प्यार का अंदाज़ समझ बैठा हूँ
वो तबस्सुम वो अदाएँ तेरी आदत ही न हो
कहीं ऐसा न हो पाँव मेरे बहकें लेकिन
तेरी इन मरमरीं बाहों का सहारा न मिले
मेरी कश्ती कहीं दरियाओं में डोले डूबे
और तेरे प्यार के सागर का किनारा न मिले
ख़ैर सब सोच के सोचा तुझे बतला दूँगा
मेरी धड़कन को तेरी धड़कनों से रक़बत है
तेरे दिल का तू मुझे हाल बता क्या है ज़रा
मेरे दिल का तो वही हाल इसे उल्फ़त है
मैं ने बतला के तुझे देख ज़रा क्या पाया
अपने ख़्वाबों का मज़ा खोए हुए बैठा हूँ
तेरे आने से भी पहले मैं अकेला था मगर
तेरे जाने पे मैं सहरा की तरह तन्हा हूँ















