होना तो नहीं चाहिए पर यार हुआ तो

रहबर ही मेरी राह की दीवार हुआ तो

तू अपनी अना में जिसे कम आँक रहा है
इक दिन तेरे लश्कर का वो सरदार हुआ तो

तिनका भी जिसे देते हो अहसान समझ कर
हर शय में बराबर का वो हक़दार हुआ तो

जिस की ख़ुशी में दोस्त कभी ख़ुश नहीं थे तुम
मुश्किल में वही शख़्स मदद-गार हुआ तो

कहते हैं उदासी का सबब इश्क़ में जिस को
दरअस्ल वही हिज्र मज़ेदार हुआ तो

— Om awasthi

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