"तुम्हें होना था मेरा"
पन्ना पन्ना फट गया दिल मेरा तुम पढ़ न पाए
लिखे थे जो ख़त तुम्हें,कभी स्कूल कॉलेज में
नामाबर से पूछते थक गए,मगर जवाब नहीं आए
तुम्हें होना था मेरा, तुम मुझे छोड़ कर किसी और के हिस्से में आए
क्या लाल,पीला क्या हरा नीला,फीका ही रहा रंग इश्क़ का
इश्क़ में तुम्हारे बा'द किसी के हो न पाए
निक़ाह क़ुबूल हो गया तुम्हारा हम हिज्र काटते रह गए
सब कुछ हुआ हम विसाल-ए-यार न हो पाए
बहुत कुछ रहा वाबस्ता देहर में,बस हम ही वाबस्ता न रह पाए
तुम्हें होना था मेरा,तुम मुझे छोड़ कर किसी और के हिस्से में आए
— Pankaj murenvi















