jab kabhi pehle use barta nahin main | जब कभी पहले उसे बरता नहीं मैं

  - Kabiir

जब कभी पहले उसे बरता नहीं मैं
क्यूँ भला उस पे यकीं करता नहीं मैं

शख़्सियत के ऐब गर मालूम होते
राज़ दिल के फिर 'अयाँ करता नहीं मैं

याद-ए-माज़ी जो सताता गर न होता
ज़िक्र उस का करने से डरता नहीं मैं

ज़ख़्म दिल पे जो दिए उस दिल-नशीं ने
सब हरे रक्खे कभी भरता नहीं मैं

वा'दा-ए-दीदार इक उस ने किया था
हसरत-ए-दीदार में मरता नहीं मैं

  - Kabiir

Dil Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Kabiir

As you were reading Shayari by Kabiir

Similar Writers

our suggestion based on Kabiir

Similar Moods

As you were reading Dil Shayari Shayari