इन आँखों से तुम्हें बच्चे लगे दिल
मुझे तो काँच के टुकड़े लगे दिल
है सिर पे बोझ जिस के मुश्किलों का
भला उस शख़्स का कैसे लगे दिल
किसी को दिल मैं अपना क्या ही देता
मुझे सब ने दिए काँटे लगे दिल
उसे भी शौक़ है दिल तोड़ने का
मेरी भी आरज़ू उस से लगे दिल
मेरी हालत जो देखी सो हुआ ये
कि मुझ को देख कर रोने लगे दिल
मुहब्बत मुफ़्त में जो मिल गई थी
तभी शायद उसे सस्ते लगे दिल
— Prashant Sitapuri















