ik aur jhagda chahiye jhagde ke baad bhi | इक और झगड़ा चाहिए झगड़े के बाद भी

  - Rahul Gurjar

इक और झगड़ा चाहिए झगड़े के बाद भी
क्या मन नहीं भरा है तमाशे के बाद भी

अच्छा निकास कर गया आँखों में तेरा हिज्र
रोता हूँ सारा दिन तुझे रोने के बाद भी

मरहूम शख़्स था कोई यादों में जी गया
पागल कहीं गया नहीं मरने के बाद भी

तुझपे कहानी ख़त्म नहीं होगी मेरे यार
फिर क़िस्से जुड़ते जाएँगे क़िस्से के बाद भी

ये रात आख़िरी थी समझ के मैं सोया था
मातम-ज़दा थे सब मेरे उठने के बाद भी

  - Rahul Gurjar

Raat Shayari

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