याद में हम दिए जलाते हैं
जाने वाले तो छोड़ जाते हैं
आप करते हैं इश्क़ का मातम
जश्न हम हिज्र का मनाते हैं
तब कहीं एक नज़्म होती है
आप नजदीक ज़ब बुलाते हैं
रौशनी भी नसीब नइ उन को
शहर में वो दिए बनाते हैं
कोई होगा कहीं पता उन का
लोग बिछड़े कहाँ को जाते हैं
आप जाते नहीं है यादों से
याद आते थे याद आते हैं
— Ankit Raj















