हर जगह हर कहीं हो तुम
मगर ख़ुदा तो नहीं हो तुम
हैरत में हूँ ख़ुद को खंगालकर
सब से ज़्यादा यहीं हो तुम
तुम्हारे बा'द हो जाएंगी बंजर
आँखों की आखरी नमी हो तुम
सब हासिल होने पर जो खटके
वही छोटी सी कमी हो तुम
पलटना हो अगर तो मोहलत देना
पैरों के नीचे की ज़मीं हो तुम
— Rajnish















