मुझ को अभी उस के भरम में रहने दो

मैं शाइ'र हूँ मुझ को ग़म में रहने दो

बहुत ज़ियादा कुछ भी रास आता नहीं
मुतमईन हूँ मुझे कम में रहने दो

उस की मोहब्बत मांगती है अना से सौदा
सो मुझे उस के सितम में रहने दो

निकले थे सफ़र में उस के दिल में जगह को
मंजिल नहीं तो सफ़र के थकन में रहने दो

लौट रहा हूँ उस के कूचे से सब हक़ छोड़कर
उस का नाम बस मेरे सुखन में रहने दो

— Rajnish

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