नहीं है प्यार अब हमको फ़लाने से
न पड़ता फ़र्क उसके यार जाने से
हमारे पास तो वो ख़ुद ही आया था
कहाँ आया हमारे वो बुलाने से
बड़े तो हम नहीं फिर भी नज़र में हम
कहाँ झुकते किसी के भी झुकाने से
मिला है ग़म हमें अब तो बहुत ज़्यादा
नहीं हटता यही ग़म अब हटाने से
रही है याद वो हमको हमेशा से
नहीं भूले हैं उसको हम भुलाने से
बड़ा छोटा कहाँ कब कौन होता है
ज़मीं पे या गगन में बैठ जाने से
रहेगी छाप तो उसकी हमेशा ही
नहीं मिटता यहाँ पे ग़म मिटाने से
तरस आता नहीं अब तो उसे 'रौनक'
हमारी जाँ हमारा दिल दुखाने से
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