meri udaasiyon ke kisse banaa rahi hai | मेरी उदासियों के किस्से बना रही है

  - Ravi 'VEER'

मेरी उदासियों के किस्से बना रही है
वो इस तरह से अपनी नफ़रत जता रही है

मैं रोज़ माँगता हूँ खुशियाँ ख़ुदास उसकी
वो रोज़ दर्द देकर मुझको रुला रही है

इस 'इश्क़ ने मुझे ग़म सौगात में दिए हैं
शायद मेरी तरफ़ से कोई ख़ता रही है

उकता गया हूँ लेकिन मरना नहीं गवारा
माँ की दुआएं मुझको ज़िंदा बचा रही है

मुझको गिला रहेगा मेरी 'इबादतों से
वरना तो किस्मतें यूँँ सबको मिला रही है

  - Ravi 'VEER'

Ulfat Shayari

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