वो बदलता जा रहा है सूरतें अपनी मगरमैं चलाता जा रहा हूँ काम इक तस्वीर सेशहर को बदले उसे तो इक ज़माना हो गयाअब भला क्या काम उस को गाँव बैठे 'वीर' से— Ravi 'VEER'